Home > OBI > Health Care > बेबी दास ने अपनी प्रार्थना का उत्तर पाया

बेबी दास के सामने एक सिलाई की मशीन रखी थी पर उसे ऐसा लग रहा था मानों वह कोई सपना देख रही थी क्या यह सच में उसके जीवन में हो रहा था? अपनी निज की सिलाई मशीन होना अपने आप में एक चमत्कार था।

उसके विचार अपने अतीत में पहुँच गए थे। उस समय जब सब कुछ ठीक था और उसके माता-पिता उसके साथ थे। लेकिन फिर सब कुछ बदल गया था क्योंकि उसकी शादी हो गई थी। उसकी परेशानियाँ तो शादी केBabyDass-LH1 बाद शुरू हुई थीं क्योंकि उसका पति बड़ा ही गैरज़िम्मेदार व्यक्ति था। वह बहुत सी बुरी आदतों का शिकार हो गया था इस लिए भारी कर्ज़े में डूब गया था। फिर उस कर्ज़ का भार उसके परिवार पर आ पड़ा क्योंकि उसका पति घर से गायब हो गया था। वह उसे और उसके परिवार को छोड़ कर भाग गया था। अब बेबी दास पर इपनी दो बेटियों को बड़ा करने की ज़िम्मेदारी आ पड़ी थी। उसकी बड़ी बेटी आँचल 10 साल की थी और दूसरी बेटी रौशनी जो छोटी थी केवल 2 साल की थी। शुरू में उसने बड़े सपने देखे थे कि वह अपनी बेटियों को अच्छे से बड़ा करेगी। उनको पढ़ाएगी-लिखाएगी। लेकिन जब उसका पति उसे छोड़ कर चला गया तब उसके सारे सपने और इरादे चकना चूर हो गए थे।  तब वह अपने पति का घर छोड़ कर अपने माता-पिता के साथ रहने चली गई जो बूढ़े थे और अकसर बीमार रहते थे।

अपने बूढ़े और बीमार माता-पिता की देख भाल के साथ अपनी बेटियों की देख भाल करने के लिए बेबी को भारी संघर्ष करना पड़ा था। उसने एक दर्ज़ी के सहायक के रूप में काम करना शुरू किया। लेकिन इसके इलावा भी वह कुछ अतिरिक्त कार्य करती थी जिससे कुछ और पैसे कमा सके। काम की खोज में तथा काम मिल जाने पर उसे जगह-जगह जाना पड़ता था। उसे देर रात कर काम करना पड़ता था। और उसे बहुत सी बातों से संघर्ष करना BabyDass-LHपड़ता था क्योंकि वह एक युवती थी जिसका कोई सहायक नहीं था। उसे हमेशा काम मिल जाता था क्यों कि वह एक कुशल दर्ज़ी थी। लेकिन इस के साथ-साथ उसे बड़ी कठिनाईयों का सामना भी करना पड़ता था। क्योंकि हमारा समाज एक पुरुष प्रधान समाज है। और उसे हर पल पुरुषों की बुरी नज़रों का सामना करना पड़ता था। उनके द्वारा की गई छेड़-छाड़, और सड़क पर चलते हुल्लड़बाज़ो का फबतियाँ कसना आदि। उसे दूर-दूर तक यात्रा करनी पड़ती थी जो की काफी पीड़ादायक होती थी क्योंकि उसे हर जगह पैदल चल कर जाना पड़ता था। उसके पास और कोई चुनाव नहीं था सिवा इसके कि वह अपने पति का कर्ज़ उतारने तथा अपने बच्चों की ज़रूरते पूरी करने के लिए यह सब करती रहे।

हर दिन सवरे बेबी दास एक चमत्कार के लिए प्रार्थना करती थी कि कुछ ऐसा हो जाए की उसकी परिस्थिति बदल जाए। उसे बहुत बुरा लगता था क्योंकि वह अपने घर और बच्चों से बहुत समय तक दूर रहती थी। हर दिन उसे काम से लौटने में देर हो जाती थी और जब तक वह घर पहुँचती थी बच्चे सो जाते थे। वह अपने बच्चों के साथ समय बिताने को तरस गई थी पर आशा करती थी कि एक दिन ऐसा अवश्य आएगा जब वह एक ऐसा काम पा लेगी जहाँ से वह समय पर लौट कर अपने बच्चों के साथ अच्छा समय बिता पाएगी।

उसे अपनी प्रार्थनाओं का उत्तर मिला था ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया के सौजन्य से जो एक सामाजिक उन्नति का प्रोजेक्ट चला रही थी। ओ.बी.आई. को बेबी दास की दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति के विषय में एक एन.जी.ओ. के द्वारा पता चला। तब यह जान कर कि वह एक कुशल दर्ज़ी का काम जानती है उन्होंने उसे एक उच्च क्वालिटी की सिलाई मशीन भेंट कर दी। यह उसके लिए एक बड़ा ही मनोहर अवसर था। उसके लिए यह मानना असम्भव हो रहा था कि उसे इतना उत्तम उपहार मिला है और उसकी सबसे बड़ी आशा वास्तविकता बन कर पूरी हो गई है। उसका सपना पूरा हो चुका था। वह इससे भ अधिक खुश तब हुई थी जब उसके पुराने गाहक उसके घर पर जो कि एक गन्दी बस्ती में स्थित था, वहीं आकर काम दे कर गए थे। अब बेबी दास अपने दर्ज़ी के काम में बहुत खुश है क्योंकि उसे घर पर ही इतना काम मिल जाता है कि उसे दर-दर भटकना नहीं पड़ता है। और साथ ही उसे अपने बच्चों के साथ समय बिताने के लिए काफी समय मिल जाता है। वह ओ.बी.आई.की बहुत आभारी है क्योंकि वही हैं जिन्होंने उसे एक सिलाई मशीन देकर इस लायक बना दिया है कि वह नियमित रूप से पैसा कमा सकती है और अपने घर ककी ज़रूरत पूरी कर सकती है और अब वह एक स्वावलम्बी व्यक्ति बन चुकी है।

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