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16 जून शाम साड़े चार बजे का समय था जब 41 वर्षीय बासुदेव अपने घर के अन्दर प्रवेश कर रहा था क्योंकि बारिश होनी शुरू हो गई थी। उसने अपनी सब से छोटी बेटी कुशी से भी कहा था कि वह अन्दर आ जाए क्यों कि बारिश तेज़ होती जा रही थी। ऐसा लग रहा था मानो आकाश फट रहा था और बारिश और भी तेज़ होती जा रही थी। सब तरफ चीखने चिल्लाने की आवाज़े आ रही थीं और कहा जा रहा था जल्दी से जल्दी अपने घर खाली कर Basudev_Bhatt_DR4के वहाँ से निकल जाएँ। बासु देव को कुछ समझ नहीं आ रहा था इस लिए उसने अपने परिवार के लोगों से बाहर जाने को कहा और स्वयं कुछ सामान उठा कर बाहर ले जाना चाहा। लेकिन कुछ ही क्षणों ने पानी का तेज़ बहाव उनके घर में घुसता चला गया उसे याद आता है कि पानी उछल कर 40 फुट की ऊँचाई को छू रहा था। बासुदेव और उसका परिवार सब कुछ छोड़ कर अपनी जान बचाने के लिए तेज़ी से वहाँ से निकल गए। कुछ ही मिनटों में वे ऊँचाई के एक खेत पर चढ़ गए और वहाँ से खड़े होकर अविश्वास के साथ हैरानी से अपने घर के विनाश को देख रहे थे कि कैसे पानी का तेज़ बहाव उनके घर को गिरा कर उसके अन्दर के सारे सामान को बहा कर ले जा रहा था। और जल्दी ही सब कुछ उनकी आँखों से ओझल हो गया था। वह भूमि भी जहाँ पर उनका घर बना था वह भी दिखाई नहीं दे रही थी। क्योंकि पानी सब कुछ बहा कर ले गया था यहाँ तक मिट्टी भी और वहाँ पर 40 फुट गहरा पानी था।

Basudev_Bhatt_DR3बासुदेव इतना चकित था कि उसने कहा यह सब कुछ वास्तविक नहीं लग रहा है। ऐसा लग रहा है मानों यह एक सपना हो। कुछ घंटे बाद जब उसने अपने पूरे परिवार को एक साथ देखा था जिस में उसके उसकी पत्नी विजया देव भट्ट, 16 साल की बेटी रेखा, 10 साल का उसका बेटा अभिषेक, सबसे छोटी बेटी कुशी और कार्ति नन्द शेमवाल जो उनके ससुर थे सब रो रहे थे। और यही वह समय था जब सच्चाई ने उन को आहत किया था। उसने और उसके परिवार ने सब कुछ खो दिया था सिवा उन कपड़ों के जो वे पहने हुए थे।

वासुदेव भट्ट् एक गरीब परिवार से सम्बन्ध रखता है पर वह एक बहुत ही मेहनती इन्सान है। उसने अपने जीवन में बहुत मेहनत और प्रयास से अपने परिवार की हर ज़रूरत को पूरा किया था। बड़ी कोशिशों के बाद उसे जर्मनी में काम करने का अवसर मिला था। वहाँ पर उसने 5 साल तक काम किया था और काफी पैसा बचाने के बाद वह  अपने परिवार के साथ वापस भारत आया था। तब उसने तिलोह में जो उत्तराखण्ड में स्थित है एक बड़ा सा मकान बनाया था। उसने अपने बच्चों को अच्छे से स्कूल में भर्ती करा दिया था। और फिर वहीं बस गया था। Basudev_Bhatt_DR2नियमित रूप से कमाई के लिए उसने एक आटे की मिल शुरू की थी। और अपने इस छोटे से व्यापार को भली प्रकार से चला रहा था। सब कुछ अच्छे से चल रहा था उस दिन तक जब एक तबाही ने उसका सब कुछ नाश कर दिया था। एक बादल का फटना, तेज़ वर्षा, भारी बाढ़ और ज़मीन का टूट-टूट कर बह जाना। जिसका नतीजा था बहुत से जीवनों का नष्ट हो जाना और बहुत से घरों का तबाह हो जाना।  अर्थात जान और माल का भारी नुकसान जिस में घरों, पुलों के साथ पूरा तिलोह गाँव का बह जाना भी शामिल था। आज भी बहुत से लोग लापता है, लोग सदमें में है उनको इस बात का अन्दाज़ा भी नहीं है कि इस तबाही के कारण उन्हों ने अपने जीवन में क्या-क्या खोया है। बासुदेव और उसका परिवार उन लोगों में शामिल हैं जिन्होने सब से अधिक खोया है, वह शारीरिक रूप से बिमार है और मानसिक रूप से ठीक नहीं है उसकी मनोभावनाएँ भी आहत हैं। ऐसा लगता है कि इस तबाही ने उसकी सारी शक्ति और सामर्थ को चूस लिया है। उसका परिवार भारी उलझनों में फंसा है।

Basudev_Bhatt_DR1ओ.बी.आई. और सी.बी.एन. ने मिल कर उस गाँव में एक स्वास्थ्य तथा राहत का शिविर लगाया है। वहाँ पर उन्होंने लगभग      लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की हैं। और लगभग      लोगों को भोजन उपलब्ध कराया है। इसके साथ-साथ उन्हों ने ज़रूरी आपत्कालीन वस्तुएँ भी उपलब्ध कराई हैं। बासुदेव और उसका परिवार भी उन लोगों में शामिल है जिन्होंने इस सहायता का लाभ उठाया है। उस के पूरे परिवार को कपड़े, खाना पकाने के लिए बरतन, कम्बल और काफी मात्रा में एक महीने के लिए भोजन पकाने की सामग्री भी दी गई थी।

ओ.बी.आई. के दल ने इस परिवार की एक और सहायता भी की थी कि उन सब को उत्तर काशी के मूल शिविर तक पहुँचा दिया था। जहाँ पर सलाह देने वाले दल ने उनको इस परिस्थिति से जूझने के लिए सलाह दी थी। उन्होंने इस परिवार के साथ समय बिताया, उनके लिए प्रार्थना की और उनका उत्साह बढ़ाया था। यह समय जो ओ.बी.आई. के दल ने उनके साथ बिताया था इससे बासुदेव और उसका परिवार बहुत ही उत्साहित हुआ था। उन्होंने अपने तनाव और परेशानी से निकल कर एक आराम का अनुभव किया था। फिर वे ओ.बी.आई. के दल के साथ रविवार की आराधना में भी शामिल हो गए थे जिसका आयोजन राहत शिविर में ही किया गया था।

आजकल बासुदेव अपने एक मित्र के घर पर रह रहे हैं और उस रसद के साथ जो ओ.ब.आई. ने उन को दी थी वह उनके लिए एक बड़ी आशीष है। बासुदेव अब इस घटना से सम्भल रहा है और आशा करता है कि वह इस मुशकिल समय से जल्दी ही निकल पाएगा। ओ.बी.आई. प्रयास कर रही ह कि किसी प्रकार बासुदेव की सहायता कर सकें जिससे वह अपने व्यापार को फिर से स्थापित कर सके।

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