Home > OBI > Health Care > कमलाम्मा के लिए निशुल्क आँख का ऑपरेशन

अपनी 70 वर्ष की बूढ़ी आयु में भी कमलाम्मा बड़ी फुर्ती से घर के सारे खुशी-खुशी काम करती थी जैसे कि अपने बच्चों के लिए खाना पकाना आदि। वह और उसका पति बस्वानाप्पा दोनों अपने 4 बच्चों के था उनके परिवारों के साथ ही रहते हैं। वे सभी एक संयुक्त परिवार के रूप में कर्नाटका में विदार के पास पथुर्पल्ली गाँव में रहते हैं। उसके लड़के दैनिक मज़दूरी करने के लिए कठिन परिश्रम करते हैं जिससे घर की ज़रूरतें पूरी कर सकें।

Kamalamma_EYEकमलाम्मा और उसके पति वस्वानाप्पा दोनों ही अपनी ज़रूरतों के लिए अपने बेटों पर ही निर्भर करते हैं। वह कमलाम्मा ही थी जो अपनी बहुओं को उत्साहित किया था कि वे बाहर मज़दूरी करने जाएँ जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो जाए। लेकिन यह तभी सम्भव होता है जब कमलाम्मा धर के सारे काम करे। सब कुछ अच्छे से चल रहा था पर फिर कमलाम्मा को आँखो की नज़र अचानक से कम होती जा रही थी। अब उसे अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस कारण उसके काम करने में बाधाएँ आने लगी थीं। अब कमलाम्मा स्वयं को निराश अनुभव करने लगी और उसे लगा कि किसी ने उसका आनन्द चुरा लिया है क्योंकि अब वह अपने परिवार की सहायता नहीं कर सकती है। उसके बच्चे स्कूल से छुट्टी लेकर बारी-बारी कमलाम्मा की देखभाल करते थे। यह बात कमलाम्मा बहुत दुखी और परेशान थी कि बच्चों को स्कूल से उसके कारण छुट्टी लेनी पड़ती थी। वह बहुत ही निराश थी और चाहती थी कि उसकी इस समस्या का कोई समाधान निकल आए। हालाँकि वह चाहती थी कि वह डॉक्टर के पास जा कर अपना सही से इलाज कराए। लेकिन समस्या यह थी कि उनकी आर्थिक परिस्थिति इतनी खराब थी कि न तो वह डॉक्टर की फीस भर सकती थी और न ही दवाएँ खरीद सकती थी।

एक दिन दोपहर को उसका पोता दौड़ता हुआ घर के भीतर आया और कहने लगा कि पाल के गाँव में ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया तथा उसके सहायक अस्पताल ने एक निशुल्क स्वास्थ शिविर का आयोजन किया है। सो कमलाम्मा ने थोड़ा सा भी समय नहीं गँवाया और अपे पोते के साथ उस शिविर में जा पहुँची। वहाँ पर उसे आँखों के विशेषज्ञ के पास भेज दिया था। वहाँ पर विशेषज्ञ ने उसकी आखों की जाँच की और पता चला कि कमलाम्मा की उलटी आँख में मोतियाबिन्द उतर आया था और उसका तुरन्त ऑपरेशन करना ज़रूरी था जिससे उसकी देखने की स्तिथि को सुधार लाया जा सके। हालाँकि कि कमलाम्मा खुश थी कि उसकी आँखों की जाँच हो चुकी थी परन्तु वह दुखी थी क्योंकि उसकी परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं आया था।

कमलाम्मा ने आँखों से बहते आँसुओं के साथ कहा था, “मेरे पास ऑपरेशन के लिए पैसे नहीं है।” परन्तु कमलाम्मा नही जानती थी कि उसके लिए क और आशीष प्रतीक्षा कर रही थी। उसकी समस्या को समझने के बाद डॉकटर ने उसे यह शुभ समाचार दिया था कि ओ.बी.आई. उसका ऑपरेशन निशुल्क करने वाले हैं और फिर उसे एक तिथि दी और कहा कि उस तिथि को ओ.बी.आई. के सहायक अस्पताल पहुँच जाएँ। फिर उसका आपरेशन सफलता पूर्वक समपन्न कर दिया गया था। उसकी देखने की स्थित सामान्य कर दी गई थी। कमलाम्मा का चेहरा मुस्कान से चमक रहा था और उसने कहा था, “मैं ने कभी नहीं सोचा था की मेरी देखने की स्थिति ठीक हो सकती है। सभी डॉक्टरों का धन्यवाद क्योंकि आपने ही ऐसा सम्भव होने के लिए मेरी खुले दिल से सहायता की थी। यदि आप सहायता नहीं करते तो मैं निश्चय ही अन्धी हो जाती। लेकिन अब मैं ठीक से देख सकती हूँ और अपने परिवार की सहायता कर सकती हूँ। ओ.बी.आई. धन्यवाद हो।”

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