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करीमा बी के धन्यवाद के शब्द

अपने पति की मृत्यु के कुछ ही हफ्ते बाद 60 साल की करीमा बी बीमार पड़ गईं। उनको खाँसी, ज़ुखाम ओर छींकने की बिमारी थी। उनको भूख नहीं लगती थी और वह भारी संघर्ष कर रही थीं क्योंकि उन को सामान्य रूप से साँस लेने में बहुत परेशानी हो रही थी। वह अपने बेटे और उसके परिवार के साथ रहती थी। उसका बेटा एक दैनिक मज़दूर है। अपने काम को वह बड़ी मेहनत से करता है पर फिर भी वह इतना नहीं कमा पाता है कि घर की सामान्य ज़रूरतों को भी पूरा कर सके। लेकिन करीमा के बेटे ने किसी प्रकार पड़ोसियों से माँग कर पैसा इकट्ठा किया और अपनी माँ को स्थानीय अस्पताल ले गया। वहाँ से मिली दवाओं से उसे कुछ समय तक आराम मिला था। लेकिन दो दिन के बाद उसकी परेशानी फिर से उभर आई और उसकी हालत पहले से भी बदतर हो गई थी। पर उसके बेटे के पास अब काफी पैसे नहीं थे कि करीमा बी को फिर से अस्पताल ले जा सके। करीमा के रिश्तेदार उसे देखने आने लगे और विचार करने लगे कि करीमा का इलाज कैसे कराया जाए। लेकिन वे किसी भी तरह से कोई तरीका नही ढूँढ पाए। इस बात से करीमा का बेटा अपनी माँ की सेहत को लेकर बहुत ही चिन्तित था।

तभी एक दिन एक लड़का उनके घर आया और उसने उन्हें ऑपरेशन ब्लेसिंग इंडिया (ओ.बी.आई.) के निशुल्क स्वास्थ्य शिविर के बारे में बताया जो उनके घर से 2 किलो मीटर दूर पर पालमूर, महबूब नगर में आयोजित किया जा रहा था। इस अवसर का उत्तम लाभ उठाने के लिए परिवार के लोग करीमा को उस शिविर में ले गए थे। जब डॉक्टर ने उसे देखा और जाँच की तो पता चला उसे अस्थमा का रोग है।

तब डॉकटर ने उससे बात-चीत की और सलाह दी कि वह कुछ परहेज़ रखे और वह नियमित रूप से दवा खाए और डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह पर चलने के बाद जल्दी ही स्वस्थ हो पाएगी। डॉक्टर से बातचीत करके करीमा को बहुत अच्छा लगा और उसे चैन सा मिल गया था। वह बहुत खुश थी क्योंकि सारी दवाएँ जो डॉक्टर ने लिखी थी वे सभी ओ.बी.आई. के दल ने ही निशुल उसे दी थीं। दल के सदस्यों ने उसे यह भी समझाया था उसे दवाएँ किस प्रकार लेनी है और उसे किस प्रकार का भोजन खाना है।

करीमा बी ने कहा था, “मुझे लगता था कि मैं इस बिमारी के कारण मर जाऊँगी पर ओ.बी.आई. की सहायता के कारण मुझे मेरा स्वास्थ्य वापस मिल गया है इसलिए मैं ओ.बी.आई. का धन्यवाद करती हूँ। करीमा के बेटे को भी अब चैन मिला है क्योंकि उस की माँ को सही इलाज मिला है और उसे विश्वास है कि अब उसकी माँ निश्चय ही ठीक हो जाएगी। उसने ओ.बी.आई. के उस कार्य की प्रशंसा की जिसके द्वारा वे समाज के उस भाग की जो गरीब और असहाय हैं उनकी सहायता करते हैं।”

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