Home > OBI > Living Waters > केशर बाई – मराडे वाड़ी की केशर बाई के पास उत्सव मनाने का कारण था

Keshar-Bai-LW145 वर्ष की केशर बाई और उसका पति कान्थीलाल मराडे वाड़ी के निवासी हैं, जो कि इदनापुर, पूने का एक दूर अन्देश गाँव है। उस गाँव में लगभग दद परिवार रहते तहैं जिन में से 50 प्रतिशत लोग अनुसूचित जाति के हैं। वे खेती तथा अन्य समान्य कार्यों पर निर्भर करते हैं। वह एक शान्त गाँव है परन्तु गर्मी के कारण वहाँ पर बहुत कम वर्षा होती है और नतीजा यह होता है कि ठीक से फसलों की उपज नहीं हो पाती है। इस कारण यह इलाका सूखा ग्रस्त हो जाता है। इस गाँव के लोग बहुत सी समस्याओं का सामना करते हैं जैसे काम न मिलना, पानी की कमी, गरीबी, बिमारी और रोग। पानी तो उनकी सबसे बड़ी ज़रूरत है। और रोज़ के कामों के लिए पानी उपलब्ध करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती है।

केशर बाई और कान्थीलाल का एक व्यसक पुत्र है जिसकी शादी हो चुकी है और वे सब एक साथ रहते हैं। उनका बेटा और बहु अब भी पढ़ रहे हैं इस लिए वे पास के शहर में पढ़ने जाते हैं। वे भोर सवेरे घर से निकल जाते हैं क्योंकि जिस शहर में वे पढ़ने जाते हैं वह 35 किलो मीटर दूर है। केशर बाई और कान्तिलाल के लिए सड़ी गर्मी में काम करना आसान नहीं है। विशेषकर ऐसे स्थान पर जहाँ थोड़ी सी भी छाँव नहीं है और तापमान 45 डिगरी हो। काम करने की स्थितियाँ बहुत ही कठिन है सो वे जैसा भी काम मिलता है उसे करने निकल पड़ते हैं। वे भोर सवेरे घर से निकल जाते हैं शाम को देर से घर लौटते हैं।

उनकी सबसे बड़ी समस्या है पानी। बिना बारिश के फसल उपज भी नहीं होती है, धरती पूरी तरह से सूख चुकी थी। महाराष्ट्र का यह गाँव सूखे का बचा-कुचा क्षेत्र है। खेतों को ऐसे ही छोड़ दिया गया है। खेत में रोपी उपज सूख कर मर रही है या फिर मर चुकी है। और सब से बड़े दुख की बात यह है कि मराडे वाड़ी का अपना कोई पानी का स्रोत नहीं है। वे सदा उस पानी पर निर्भर रहते हैं जो सरकार टैंकर के द्वारा सप्लाई करती है और जो उनके गाँव से आधा किलो मीटर दूर से आती है। केशर बाई को पानी भरने के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते जिससे वह पानी अपने घर तक ले जा सके। वह पानी को ला कर घर में रखे बड़े-बड़े ड्रमों में या प्लास्टिक के बड़े-बड़े पात्रों में भर कर रखते हैं। टैंकर केवल सप्ताह में दो बार ही आता है और उसी से लोगों को अपनी ज़रूरत के अनुसार पानी भर कर रखना पड़ता है। फिर कई बार तो टैंकर नियमित रूप से नहीं आतै है इसलिए कई बार केशर बाई की काम पर नहीं जा पाती है इस प्रकार उस दिन का वेतन खो देती है क्योंकि उस दिन उसे जबरन पटैंकर के आने ककी प्रतीक्षा करनी पड़ती है जिससे से ज़रूरत के अनुसार पानी भर सके। यह एक थका देने वाला काम था जो उसके स्वास्थ्य पर असर कर रहा था। ओ.बी.आई. के दल का उनके गाँव में आना और सफलता पूर्वक एक बोरवेल की स्थापना करना पूरे मराजे वाड़ी गाँव के लिए बड़ा ही शान्तिदायक सिद्ध हुआ था। केशर बाई के साथ पूरा गाँव आनन्द मना रहा था क्योंकि उनको पानी का एकक निजि स्रोत मिल गया था जिसके लिए अब उनको किसी पर निर्भर नहीं करना था जिसकी कमी वे अब तक अनुभव कर रहे थे। यह निश्चय ही उत्सव मनाने का अवसर था। पूरा गाँव इस अदभुत प्रयोजन के लिए ओ.बी.आई. का आभारी था। केशर बाई अब बहुत खुश थी क्योंकि अब वह नियमित रूप से काम पर जा सकती थी क्योंकि अब पानी को लेकर कोई समस्या नहीं होगी। वह ओ.बी.आई. के लिविंग वाटर्स के प्रेम और सेवा के लिए उनकी आभारी है।

One Coment, RSS

  • Vijay Dwivedi

    says on:
    October 7, 2014 at 6:18 pm

    You are doing very good job for needy peoples in Chakia Thanks to you.

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