Home > OBI > Health Care > मरियप्पन – कठिन समय में सहायता

मरियप्पन और उसकी पत्नी अमूथा दोनों तमिल नाडु में पोलाची के पास स्थित लक्ष्मी नगर में रहते थे। वे दोनों अकेले ही रहते थे क्योंकि उनका इकलौता बेटा रमेश शादी करके पलाकड गाँव में जा कर बस गया था। वे दोनों आयु में बढ़ रहे हैं और दिन ब दिन कमज़ोर होते जा रहे हैं। इस कारण वे अकसर बिमार भी रहने लगे हैं। मरियप्पन अब 73 साल के हो चुके हैं और अपनी बिमारी के कारण उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया है। पहले मरियप्पन एक दैनिक मज़दूर का काम करता था परन्तु अब कुछ काम नहीं कर पाता है इस लिए अब मजबूरन अमूथा का काम करना पड़ता है। और वह अब घरों में नौकरानी का काम करती है। उनका बेटा उनकी कोई सहायता नहीं कर पाता था और यदि पैसे भेजता भी था तो वह बहुत ही कम पैसे होते थे।

मरियप्पन की हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही थी। अब उसे भयानक खाँसी हो गई थी और साथ ही उसे दमें की शिकायत भी रहने लगी थी। उसकी पत्नी को कोशिश की थी कि उसे स्थानीय डॉक्टर के पास ले जाए परन्तु उसके इलाज से मरियप्पा की हालत में कोई सुधार नहीं आया था बल्कि उसकी हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही थी। अमूथा को चिन्ता सताने लगी थी क्योंकि उसे घर का सारा काम भी करना पड़ता था, और अपने पति की देखभाल के साथ-साथ बाहर के घरों में काम भी करना पड़ता था। कई बार वह काम पर नहीं जा पाती थी और नियमित रूप से काम पर न जाने से उसे डर लगा रहता था कि कहीं वह अपने काम से हाथ न धो बैठे। वे दोनों ही अपने जीवन में बड़े दुख भरे समय से गुज़र रहे थे। मरियप्पन अपने को बहुत ही असहाय अनुभव करता था क्योंकि उसे हर समय अपनी पत्नी पर निर्भर रहना पड़ता था और वह अपनी पत्नी की किसी तरह से भी सहायता नहीं कर पाता था। अमूथा भी बहुत चिन्तित रहती थी क्योंकि उसके पति की हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही थी और वह अपने को बहुत ही असहाय अनुभव करती थी क्योंकि उसका कोई भी प्रयास सफल नहीं हो रहा था। न ही उसके पति की स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार था और न ही उनकी जीवन की परिस्थितियों में कोई सुधार था।

अब अमूथा भी दुखी और निराश रहने लगी थी लेकिकन तभी उसने एक घोषणा सुनी जिसने उसके अन्दर एक आशा की किरण जगा दी थी। अपने काम पर जाते समय अमूथा ने एक घोषणा सुनी जिस में किसी निशुल्क स्वास्थ्य शिविर के विषय में बताया जा रहा था। जिसका आयोजन उनके गाँव में उनके घर के पास ही किया जा रहा था। उस पता चला कि शहर के डॉक्टर आकर रोगियों की जाँच करेंगे। उसने इस शिविर के बारे में और भी जानकारी प्राप्त की और फिर अपने पति को लेकर सही समय पर पञ्जीकरण कराने के लिए ओ.बी.आई. के स्वास्थ्य शिविर में जा पहुँची। वहाँ पर डॉक्टरों ने उसे देखा और फिर विशेष जाँच भी कराने को कहा। उस जाँच से पता चला कि उसे दमें और निमोनिया की शिकायत थी।

मरियाप्पन को शिविर से ज़रूरी दवाएँ और सलाह भी दी गई थी। अमूथा ओ.बी.आई. के दल द्वारा दी गई हर सहायता से बहुत खुश थी। और अब उसे आश्वासन था कि उसका पति फिर से स्वस्थ हो जाएगा। मरियाप्पन भी बहुत ही उत्साहित था क्योंकि अब उसे समझ आ गया था कि उसकी समस्या का एक हल है। दोनो पति पत्नी ओ.बी.आई. के आभारी हैं और उनकी बूढ़ी आयु में की गई सहायता के लिए उनका धन्यवाद करते हैं। निशुल्क जाँच, दवाएँ और सलाह मरियाप्पन और अमूथा के लिए एक बड़ी आशीष थी। इस सब के कारण ही उन्होंने एक अच्छे भविष्य की आशा पाई थी।

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