Home > OBI > Living Waters > रेशमा – पचमौली ने पानी का उपहार पाकर उत्सव मनाया

रेशमा और उसके पति पचमौली गाँव के वासी हैं जो महाराष्ट्र में धुले नामक ज़िले का एक दूरअन्देश गाँव है। वे दोनों दिन ब दिन बूढ़े होते जा रहे हैं। रेशमा जोड़ों के दर्द तथा अन्य कई बिमारियों से पीड़ित है। उसका पति अब 60 साल का होने आया है और अब अपनी दिनचर्या को सही से और नियमित रूप से पूरा नहीं कर पाता है। उनका गाँव जो आदिवासियों का गाँव है अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है। यहाँ पर जीविका कमाने का मुख्य साधन खेती है। यह गाँव अकसर कड़ धूप का सामना करता है और अनेक बार यहाँ पर सूखे की स्थिति भी देखने को मिलती है। पानी की कमी यहाँ पर एक ऐसी प्रतिदिन की समस्या है जिसका सामना गाँव वालों को करना पड़ता है। इस ज़िले में सूखे की परिस्थिति तथा यहाँ पर उद्योगिक कमी के कारण लोगों को आजीविका कमाने के साधन नहीं मिलते हैं इस लिए लोग गाँव और प्रान्त को छोड़ कर पास के प्रान्त के गाँवों में काम की खोज में जाते हैं और फिर वहीं बस जाते हैं।

गाँव में पानी का एक बोर वेल एकमात्र पानी का स्रोत हैं जहाँ से पानी मिल सकता है। हर दिन माखन भाई काम की खोज में जाते हैं जब कि रेशमा घर के सारे काम निबटाने में लग जाती है। उनके सभी बच्चों की शादी हो चुकी है और वे पास के शहरों में जा कर रहने लगे हैं। गाँव का बोरवेल काफी पुराना है और ठीक से काम भी नहीं करता है। इस लिए एक घड़ा पानी भरने में भी बहुत समय लग जाता है। गाँव में छोटी और बड़ी जाति के लोग रहते हैं। रेशमा भील जाती से सम्बन्ध रखती है जो तुलना करने पर कोंकनी जाति से निम्न गिनी जाती है। इस कारण रेशमा को प्रतीक्षा करनी पड़ती है जब तक ऊँची जाति के लोग अपने लिए पानी नही भर लेते हैं। केवल उसके बाद ही रेशमा पानी भरने के लिए बोरवेल के पास आने दिया जाता था।

Reshma_LW-OBIHOmeगर्मियों में जब बोरवेल सूख जाता था तब रेश्मा को 1 किलो मीटर दूर खेत में बने बोरवेल से पानी भरने जाना पड़ता था जो गाँव बाहरी किनारे पर स्थित था। इतनी दूर चल कर जाना और पानी के घड़े भर कर लाना बहुत ही कठिन काम था इस लिए अनेक बार रेशमा और उसके परिवार को बिना पानी के रहना पड़ता था। फिर जिस दिन उसका पति उसकी पानी भरने में सहायता करता है उस दिन वह काम पर नहीं जा पाता है। और यह उनके लिए एक और बड़ी समस्या खड़ी कर देता है। तभी एक दिन गाँव में आने वाले एक समाज सेवक धनीलाल जो सोचता था कि इस गाँव में पानी की कमी और सूखे का इतिहास है उसके कहने पर ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया का दल उनके गाँव का निरीक्षण करने आया था। उनकी सहायता से जल्दी ही गाँव की भूमि का निरीक्षण किया गया और फिर सही स्थान पर सफलतापूर्व एक नए बोरवेल की स्थापना कर दी गई। इस प्रकार गाँव को पानी का एक नया स्रोत मिल गया।

सारा गाँव इस नए बोरवेल के लिए उत्सव मना रहा है और रेश्मा के साथ मिल कर गाँव की सारी स्त्रियों ने ओ.बी.आई. का धन्यवाद किया था क्योंकि उनके दल ने उन को पानी का यह अदभुत उपहार दिया था।

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