Home > OBI > Vidya Jyothi > स्नेहा और उसके भाईयों ने स्कूल में प्रवेश पाया

तीन बच्चों को बड़ा करना परमेश्वर और उसकी पत्नी शकुन्तला के लिए एक बड़ी चुनौती थी। परमेश्वर की आर्थिक अवस्था ने उनको जबरन कर्नाटका में हैद्राबाद गुलबारा से गजुलारामरम जा कर रहने को मजबूर किया था। उसके पास कोई अन्य चुनाव नहीं थात जिससे वह अपना औप अपने बच्चों का भविष्य सुधार सके। और अपने तीन बच्चों अनील 11, स्नेहा 9 और सिद्धि जो 5 साल का था तथा अपनी पत्नी की ज़रूरतो की पूर्ति कर सके।

Sneha-VJहर दिन परमेश्वर को एक लम्बी यात्रा करनी पड़ती थी क्योंकि वहाँ पर वह एक कॉन्ट्रैक्टर के साथ दैनिक मज़दूरी करता था। परन्तु दुर्भाग्य से परमेश्वर ने प्रति दिन शराब पीनी शुरू कर दी थी। उसकी प्तनी ने उसे ऐसा करने से मना किया था और उसे समझाया कि इस तरह से वह सारा पैसा बरबाद कर रहा था परन्तु जल्दी ही वह शराब की लत का शिकार हो गया। उसने शराब के कारण उसकी नौकरी भी छूट गई थी। अब वह अपनी लत के कारण जल्दी-जल्दी बीमार रहने लगा था। उसके फेफड़ों में भारी संक्रमण पाया गया। इस लिए अब उसकी पत्नी स्नेहा को मज़दूरी करने जाना पड़ा था। जिससे वह घर की सामान्य ज़रूरतों को पूरा कर सके। अब उस पर एक और भार भी आ पड़ा था और वह थता अपने पति की देखभाल करना और उसके इलाज के लिए भी उपाय करना। उसके सारे प्रयासों के बाद भी उसके पति की हालत बिगड़ती गई और जल्दी ही उसकी मृत्यु हो गई।

अब शकुन्तला और उसके तीनों बच्चे अकेले रह गए थे बिला किसी की सहायता के। शकुन्तला उस नए स्थान से जहाँ वे आकर रहने लगे थे उससे वह बिलकुल भी वाकिफ नहीं थी। शकुन्तला के अन्दर एक भय घर गया था और वह अपनी नई ज़िम्मेदारी के विषय में चिन्तित थी। उसने एक स्थान पर अतिरिक्त पार्ट टाइम काम भी पकड़ लिया था। वह एक घर में नौकरानी का काम करने लगी थी। वह दिन का सारा समय काम करने में ही बिताने लगी और उसके बच्चे घर पर अकेले समय बताते थे। शकुन्तला उनके विषय में चिन्ता करती रहती थी। उसकी बेटी हमेशा उससे कहती थी, माँ मुझे पढ़ना है, मुझे दूसरे बच्चों के समान स्कूल जाना है। शकुकन्तला भी चाहती थी कि उसकी बेटा स्कूल जाए पर उसके पास न तो स्कूल की फीस, किताबों, और अन्य चीज़ों के लिए पैसे नहीं थे।

तभी उनके जीवन में एक चमत्कार हो गया था। अब वह अपने बच्चों को स्कूल भेज सकते थे। उसने ऑर्फन्स प्रौमिस जो कि विद्या ज्योति केन्द्र का एक भाग था। जिसके आयोजक ओ.बी.आई नाम की संस्था थी। जो गरीब और अनाथ बच्चों को शुल्क शिक्षा देने का आयोजन करती थी। शकुन्तला ने विद्या ज्योति केन्द्र से सम्पर्क किया। और उनसे अपनी परिस्थित के विषय में बतात कर अपने बच्चों को केन्द्र में प्रवेश देने की विनती की। और तब शकुन्तला के बच्चों ने विद्या ज्योति केन्द्र में प्रवेश प्राप्त कर लिया था। वहाँ पर उनको निशुल्क पुस्तकें, बस्ते, वर्दी, जूते और जुराबें भी प्रदान की गई थी। अब वे तीनों बहुत ही उत्साहित हैं क्योंकि अब वे स्कूल जा सकते हैं और स्कूल का सारा सामान उनको निशुल्क मिला था।

शकुन्तला ओ.बी.आई. की आभारी है उसके लिए जो भी सहायता उन्होंने उसके बच्चों को ऑर्फन्स प्रौमिस प्रौजेक्ट के द्वारा विद्या ज्योति केन्द्र ने दी थी। उसने कहा था, “एक अकेली माँ के कारण उसके लिए बहुत ही कठिन था कि वह अपने तीन बच्चों की देखभाल कर सकते हैं। पर विद्या ज्योति केन्द्र ने मेरे निराश दिल में एक नई आशा जगा दी थी। यह तो परमेश्वर की पवित्र योजना थी कि वह मुझे और मेरे बच्चों को ऐसी महान आशीष दें।”

One Coment, RSS

  • rajasekhar

    says on:
    December 11, 2013 at 9:53 am

    i like very much your organization when we got floods in kurnool you opetation blessing india helped us a lot.till we can’t forget your help.

    Thanks regards,
    Rajasekhar.

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