Home > OBI > Vidya Jyothi > शेवा ज्योति ने एक अर्थपूर्ण बचपन पाया

पुष्पलता एक ऐसी असम्भव परिस्थिति में फँस गई थी वह एक विधवा थी उसके दो बच्चे थे। वह पूरे दिन घरों में नौकरानी का काम करती थी और उसे अवसर ही नहीं मिलता था कि उस सब से निबट पाए जो उसके आस पास हो रहा था।  उसे इस बात से बाहर निकलना बहुत ही कठिन लग रहा था कि उसने अपने पति को खो दिया है। उसके लिए अपने पति की मृत्यु के सदमे और उससे उत्पन्न निराशा से बाहर निकलना आसान नहीं था। उसका पति एक दैनिक मज़दूर था और उस पर भारी कर्ज़ा चढ़ा हुआ था। वह अपने घर के खर्च को पूरा नहीं कर पा रहा था इस लिए बहुत ही निराश था और इसी दुख और परेशान के कारण वह टूट गया था। इस लिए उसने स्वयं को जला कर आत्महत्या कर ली थी। तब पुष्पलता और उसके बच्चों ने अपने आप को एक असहाय और निराश अवस्था में पाया था। अब उनकी सहायता करने वाला कोई नहीं था और तब पुष्पलता ने घरों में नौकरानी का काम करना शुरू किया था। परन्तु जो कुछ भी वह कमाती थी वह उसके और उसके बच्चों की सामान्य ज़रूरतों के लिए भी काफी नहीं होता था।

Sheva-Jyothi_VJ1पुष्पलता के दोनों बच्चे, शेवा ज्योति और उसका बेटा दोनों ही बहुत बुद्धिमान थे और उनको स्कूल जाना बहुत पसंद था। पुष्पलता की सब से बड़ी समस्या यह थी कि वह उन दोनों की स्कूल की फीस नहीं भर पाती थी और नहीं ही उनके लिए कापी-किताबें तथा पढ़ाई के लिए अन्य ज़रूरी सामान खरीद पाती थी जिनकी उनको ज़रूरत होती थी। अधिकतर समय शिक्षक उसके बच्चों को सज़ा देते थे क्योंकि उनकी फी जमा नहीं होती थी और न ही वे ज़रूरी किताबें लेकर स्कूल जाते थे। इस कारण अन्त में उनको स्कूल छोड़ना पड़ा था। पुष्पलता की यह हार्दिक इच्छा थी कि वह अपने बच्चों को शिक्षा से लैस कर सके। तभी एक पड़ोसी ने उसे ज्योति विद्या केन्द्र के विषय में बताया जिसका आयोजन ओ.बी.आई. ने किया था और जो गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए सहायता देते थे। सो पुष्पलता ने तुरन्त उन से सम्पर्क किया जो सिकन्द्राबाद में बोवेनपल्ली के कार्य अध्यक्ष थे क्योंकि वही केन्द्र उनके घर के पास था।

इस बात का आश्वासन पाकर कि उनकी शिक्षा निशुल्क होगी शेवा ज्योति और उसके भाई को सफलता पूर्वक विद्या ज्योति केन्द्र में प्रवेश मिल गया था। वहाँ पर उनको निशुल्क स्कूल की वर्दी, किताबें, बस्ते, जूते और जुराबों के साथ पढ़ाई की सभी ज़रूरी चीज़े भी प्रदान की गई थी। ज्योति और उसका भाई जल्दी ही केन्द्र में घुल-मिल गए थे। पुष्पलता का मन अब बहुत ही शान्त था क्योंकि उसके बच्चे अब एक सुरक्षित वातावरण में शिक्षा पा सकते हैं। उसके बच्चे अब केन्द्र में दोपहर का भोजन भी खाते हैं इस लिए पुष्पलता और भी खुश है क्योंकि अब हर दिन उसके बच्चों को पौष्टिक भोजन खाने का अवसर भी मिलता है।

शिवा ज्योति ओ.बी.आई. की बहुत आभारी है क्योंकि उनके कारण ही उसके जीवन में आनन्द आया है और उन्होंने ही उसे एक अर्थपूर्ण बचपन दिया है।  पुष्पलता का कहना है, “जो सहायता ओ.बी.आई. के विद्या ज्योति केन्द्र ने हमारी की है उसने हमारे जीवन में एक नाटकीय अन्तर ला दिया है और हम सब के जीवन को पहले से बहुत बेहतर बना दिया है। अब हमारे जीवन में एक आनन्द और संतोष की अनुभूति है। मैं बहुत खुश हूँ क्योंकि अब मेरे बच्चे शिक्षा से लैस किए जा रहे हैं। और अब वे अपने भविष्य का निडर होकर आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकेंगे।”

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