Home > OBI > Cleft Lip / Palate > सोना के लिए मुस्कराहट

रवि एक बिजली का काम करने वाला है और उसकी पत्नी मंगा एक गृहणी है। सोना उनकी पहली संतान है। लेकिन वह बहुत ही अभागन है क्योंकि उसका जन्म कटे होंठ के साथ हुआ था जिसके कारण उसका चेहरा बहुत ही विकृत लगता था। उनके लिए यह बहुत ही दुख का कारण था जब वे अपनी बेटी को दूध पीने के लिए संघर्ष करते देखते थे। वह ठीक से दूध नहीं पी पाती थी और दूध पीते समय उस फंदा लग जाता था और फिर सारा दुध बाहर निकल आता था। उसके माता पिता को अपनी बेटी को दूध पिलाने के लिए एक विशेष कला सीखनी पड़ी थी जहाँ उसके चेहरे को ऐसे रखना पड़ता था जिससे दूध सीधा खाने की नली के अन्दर जाए और उसे फंदा न लगे। सो न को बड़े ही ध्यान से एक चम्मच के साथ उसे दूध पिलाना पड़ता था। उनके कुछ रिश्तेदार उनको हिकारत से देखने लगे और कहने लगे कि उनके परिवार पर परमेश्वर का प्रकोप है। और यह उनके भविष्य के लिए अच्छा न होगा। इन सब बातों के कारण घर में सभी परेशान और चिन्तित थे।

जब रवि को पतात चला कि उसकी बेटा का चेहरा एक ऑपरेशन के द्वारा सही किया जा सकता है तो वह बहत खुश हुआ था। परन्तु बाद में वह उदास हो गया था क्योंकि वह जानता था कि ऑपरेशन केक लिए बहुत से पैसों की ज़रूरत पड़ेगी। जिसका खर्च वह नहीं भर पाएगा क्योंकि उसका वेतन बहुत ही कम था। लेकिन फिर उसके पास एक खुशी की खबर आई थी। एक सामाजिक नेत जो ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया के कटे होंठ के इलाज के विषय में पता था उसने रवि और मंगा को इस विषय में सब कुछ बताया। यह जान कर रवि और मंगा में एक नई आशा उत्पनन हुई और उन्होंने तुरन्त सही सूत्रों तक पहुँच कर ओ.बी.आई. के अधिकारिर्यों से बात-चीत की। उनकी सलाह पा कर उन्होंने तुरन्त उस सहायक अस्पताल से सम्पर्क किया और सोना को जाँच कके लिए वहाँ ले गए।

वहाँ पर डॉक्टर ने सोना की जाँच की और फिर उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया। वहाँ पर डॉक्टरों ने सोना की देख भाल की और फिर दूसरे ही दिन सफलता पूर्वक उसका ऑपरेशन भी कर दिया। रवि और उसकी पत्नी भी बहुत उत्साहित थे क्योंकि उनकीक बेटी के लिए सब कुछ अच्छी तरह से हो गया था। वे दोनों ओ.बी.आई. के बहुत आभारी थे। उन्होंने अपनी बेटी के निशुल्क ऑपरेशन तथा देख-भाल के लिए ओ.बी.आई. का धन्यवाद किया। उनकी बेटी ऑपरेशन के बाद सम्भल रही थी अब वह सामान्य रप से दूध पी सकती थी साथ ही ऑपरेशन से उसका चेहना भी सामान्य और सुनदर दिखाई दे रहा था।

रवि ने आभार प्रकट करते हुए भीगी आँखों से कहा था, “मैं तो ऑपरेशन कराने के विषय में सोच भी नहीं सकता था क्योंकि ऐसा करने की मेरी हैसियत ही नहीं थी। मैं सदा ओ.बी.आई. का धन्यवादी रहूँगा क्योंकि उन्होंने मेरी ओर अदभुत सहायता का हाथ बढ़ाया और मेरी बेटी का इलाज कराने में सहायता की है। उन्होंने मेरी बेटी को एक विकृत चेहरे के साथ जीने से बचाया है।”

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