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चारी ने जीने का नया अवसर पाया

चारू एक ब्राह्मण परिवार से सम्बन्ध रखती था। उसके पिता राघवाचार्य महानकाली मन्दिर में एक पुरोहित थे। जो सिकन्द्राबाद में बालमराई के पास स्थित है। वे वहाँ के अनेक पुजारियों में से एक थे। जब चारी तीन साल का...