Home > OBI > Health Care > सानिया ने सही समय पर सहायता पाई

15 साल की सानिया गुज़रात के झलाई गाँव में रहने वाली थी। सानिया अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी और क्योंकि उसके माता पिता दोनों कड़ी मेहनत से काम करते थे जिससे घर के खर्च पूरे कर सकें। इस लिए वह अपनी दादी के साथ रहती थी।

पर उन दोनों को की कमाई काफी नहीं होती थी जिससे वे घर का खर्च चला सकें। इस लिए वे दोनों अच्छे काम की खोज में पास के शहर में चले गए थे और अपनी बेटी को उसकी दादी के पास छोड़ गए। क्योंकि दादी बहुत ही बूढ़ी थी और कोई काम नहीं कर पाती थी इस लिए वह दादी के साथ रह कर दादी की सहायता के लिए घर का सारा काम करने लगी।

एक दिन सानिया अपनी सहेलियों से मिलने गई और फिर वहीं गली में खेलती रह गई। उसके गाँव में बहुत से आम के पेड़ थे और जल्दी ही उसे और उसकी सहेलियों को आम तोड़ने की ओर आकर्षित कर लिया था। और उन्होंने कोशिश की जो उन को दिखाई दे रहे थे उन आमों को तोड़ लें जो पक कर तोड़ने के लिए तैयार थे। वे सब पेड़ पर चढ़ गईं और वे आम तोड़ने की कोशिश करने लगीं जो वे तोड़ सकती हैं। तभी सोनिया पेड़ पर से फिसल कर गई और उसको काफी चोट लग गई थी। वह बड़ी पीड़ा के साथ रो रही थी क्योंकि उसके बाएँ हाथ में भारी चोट लगी थी। वह बड़ी पीड़ा से गुज़र रही थी। सानिया की दादी ने उसकी सहायता करने की बहुत कोशिश की थी। उन्होंने उसके हाथ को सीधा करा, और उसपर घर पर बना एक लेप लगाया और फिर उसे एक कपड़े से बाँध दिया था। लेकिन दूसरे दिन उसका हाथ बुरी तरह से सूझ गया था और उसमें असहनीय दर्द हो रहा था। यह दादी के लिए ऐसी कठिन परिस्थिति थी कि उन को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। न ही उसके पास इतने पैसे थे कि वह उसे किसी डॉक्टर के पास ले जा सके।

ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया उस समय उनके गाँव के पास ही एक स्वाथ्य शिविर का आयोजन कर रही थी। सानिया को इस शिविर के बारे में पता चला और उसने ज़ोर दिया कि वह उस शिविर में जाएगी क्योंकि उसके हाथ में बहुत पीड़ा हो रही थी। उसकी दादी उसके साथ शिविर में गई और वहाँ जा कर वे दोनो बहुत ही चकित हुए थे क्योंकि वह शिविर तो एक अस्पताल के समान था। वहाँ बहुत से डॉक्टर थे, दवाएँ थीं और बहुत सा सामान भी था जिस के द्वारा जाँच की जाती थी। डॉक्टर ने उसके हाथ की जाँच की। और उसके हाथ का एक्सरे करने को कहा। ओ.बी.आई. की बस में एक्सरे की मशीन लगी थी सो उसका एक्सरे तुरन्त कर दिया गया था। एक्सरे की जाँच से पक्का हो गया कि उसके हाथ की हड्डी टूट गई थी। तब उसे हड्डी के विशेषज्ञ के पास भेजा गया और फिर उसके हाथ पर प्लास्टर चढ़ाने की सलाह दी। इस बात को जान कर कि उसके पास कोई सहायक नहीं था इस लिए अगले दिन सवेरे ओ.बी.आई. का दल उसे लेकर एक अस्पताल में ले गया जो दाहोद में स्थित था जहाँ पहुँचने में गाड़ी द्वारा 2 घंटे लगते थे। वहाँ पर डॉक्टर ने उसकी हड्डी को जमा कर प्लास्टर लगाया गया। डॉक्टर ने उसे कुछ व्यायाम करना भी सिखाया था जो बाद में करना ज़रूरी था।
टीम के दल ने उसे ज़रूरी दवाएँ और विटामिन जैसी सहायक गोलियाँ भी दी थीं। तब वे उसे घर तक छोड़ने आए और उसकी दादी इसके लिए ओ.बी.आई. दल की सहायता के लिए बहुत ही आभारी थी। उस ने दिल से ओ.बी.आआई. दल का धन्यवाद किया जिन्होंने समय से सानिया की सहायता की थी।
और उस सहायता के लिए उसने उनको सराहा भी था क्योंकि उन्होंने सानिया की समस्या को समाधान उपलब्ध कराया था।

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